Home Page News

अक्षय तृतीया का अक्षय संदेश

विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। यह माना जाता है कि पृथ्वी पर जो आठ चिरंजीवी हैं उनमें भगवान परशुराम की भी गणना होती है।

मुख्य संदेश :

1. अहंकार नहीं करना चाहिए :

संसार में किसी का भी अहंकार ज्यादा समय तक टिकता नहीं है। भगवान परशुराम अहंकार का क्षय करके, अहंकार शून्यता की आवश्यकता को अक्षय बना देते हैं।

2. मातृ-पितृ भक्ति :

कभी भी माता-पिता की अवज्ञा नहीं करनी चाहिए। माता-पिता की आज्ञा मानने का जो फल होता है, उसे भी अक्षय माना गया है।

3. शक्ति समर्पण :

जब शक्ति की आवश्यकता नहीं हो तब उसका त्याग कर देना चाहिए। इस तरह का जो त्याग होता है वह अक्षय होता है।

4. निर्माण सृजन :

यह माना जाता है कि केरल का निर्माण उन्होंने ही किया था। जब आप कोई निर्माण कार्य करते हैं उसका यश अक्षय होता है।

5. सादगी का संदेश :

वह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अनेक योद्धाओं का परास्त किया। वो चाहते तो राजमहल के सारे सुख भोग सकते थे परन्तु उन्होंने त्यागी तपस्वी का जीवन चुना क्योंकि वे जानते थे कि सारे भोगों का क्षय हो जाएगा और केवल किया गया त्याग ही अक्षय रहेगा।

6. क्रोध की उपयोगिता :

क्रोध मानवीय स्वभाव है। क्रोध का उपयोग सही दिशा में होना चाहिए, उससे जो उत्तम लाभ प्राप्त होता है वह भी अक्षय होता है।

Leave a Reply