Home Page News

पोप से क्यों नाराज हुए ट्रंप

इन दिनों पोप से ट्रंप और ट्रंप से पोप बहुत नाराज हैं। ट्रंप चाहते हैं कि पोप उनका हर काम में सहयोग करें, लेकिन पाेप ऐसा नहीं करते हैं। नाराजगी की यही वजह है।  दुनिया जानती है, 28 फरवरी से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। विश्व के ज्यादातर देश उनके इस युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में, ट्रंप खुलकर धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल करके वह किसी भी तरह से खुद को मजबूत करना चाहते हैं।

वह आए दिन सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा पोस्ट करते हैं, जिससे लगे कि ईसा मसीह इस युद्ध में उनकी मदद कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया में ए.आई.जनरेटेड एक फोटो पोस्ट की और कहा कि ईसा मसीह उनके साथ हैं। इस पोस्ट से ईसाई जगत में भी नाराजगी फैल गई। इस पोस्ट या फोटो में ट्रंप ने खुद को देवदूत दिखाया है। वह यह बताना चाहते हैं कि वह युद्ध लड़कर कोई ईश्वरीय कार्य कर रहे हैं।

पोप लियो की नाराजगी

डोनाल्ड ट्रंप के पोस्ट पर पोप की दोटूक नाराजगी सामने आई है।  ट्रंप के धार्मिक पोस्ट पर पोप लियो ने ट्रंप को आड़े हाथ लेते हुए कहा है— ईसा मसीह कभी युद्ध के पक्ष में नहीं थे, उन्होंने हमेशा शांति का पक्ष लिया था। ईसाई धर्म युद्ध की वकालत नहीं करता है, यह शांति की बात करता है। ट्रंप को तत्काल युद्ध बंद कर देना चाहिए, ताकि निर्दोष लोग मारे न जाएं। किसी भी युद्ध में बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे जाते हैं, अत: युद्ध को धार्मिक कृत्य नहीं ठहराया जा सकता।

मुस्लिम दुनिया में नाराजगी

मुस्लिम दुनिया में भी बहुत नाराजगी है। ईरानी के धार्मिक नेता खमेनेई की हत्या के बाद से खासकर शियाओं में बहुत नाराजगी है। दुनिया भर के शिया खमेनेई को अपना रहबर मानते थे। वैसे, सुन्नियों के बीच भी खमेनेई को समर्थन मिल रहा है। चूंकि इस युद्ध में इजरायल भी अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है, इसलिए भी मुस्लिम दुनिया में नाराजगी है। एक खतरा यह है कि कहीं मुस्लिम देश एकजुट न हो जाएं। हालांकि, मुस्लिम देशों का एकजुट होना बहुत मुश्किल है।

ट्रंप का भय

ट्रंप को यही भय सता रहा है कि कहीं मुस्लिम दुनिया एक हो गई, तो वह कहीं यहूदी इजरायल के साथ अकेले न पड़ जाएं। ऐसे में, ईसाई बहुत यूरोपीय देशों का साथ उन्हें चाहिए। यूरोपीय देश अभी अमेरिका के साथ नहीं हैं। यूरोपीय देश पोप लियो के साथ खड़े हैं। यूरोपीय देश भी युद्ध नहीं चाहते और पश्चिम एशिया में अमन-चैन की गुहार लगा रहे हैं।

Leave a Reply