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हनुमान जयंती

हनुमान जी, जो आज भी जिंदा हैं!

भारतीय पौराणिक आख्यान हमें बताते हैं कि सात पौराणिक चरित्र (बलि, परशुराम, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृप, अश्वत्थामा) आज भी जीवित हैं मतलब चिरंजीवी हैं। उनका निधन असंभव है। वे हमारे आसपास विचरण करते रहते हैं। हनुमान जी भी चिरंजीवी हैं। द्वापर युग में जब राम जी के शरीर का संसार से जाने का समय आया, जब वे अपने तीन भाइयों – भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के साथ समाधि की ओर बढऩे लगे, तब उनके सबसे प्रिय सेवक हनुमान जी ने भी समाधि की इच्छा जताई, लेकिन राम जी ने उन्हें अमरता का वरदान दे दिया। राम जी ने आदेश दिया, हे हनुमान, तुम इस संसार में सदा-सदा के लिए रहना और मेरे संदेश की, मेरे भक्तों की रक्षा करना।


हनुमान जी कब आते हैं ?

हिन्दुओं में यह मान्यता है कि जहां भी भक्ति भाव से राम कथा होती है, वहां हनुमान जी सुनने चले आते हैं। वे राम भक्तों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। हिन्दू धर्म में भगवान महादेव के बाद सर्वाधिक पूजा वाले भगवान हनुमान जी ही हंै। चूंकि भारतीय संस्कृति उन्हें सहज उपलब्ध मानती है, इसलिए उनकी पूजा करती है। परंपरा के अनुसार, भारत में सर्वाधिक मंदिर महादेव के हैं और उसके बाद हनुमान जी के। ऐसा माना जाता है कि जैसे महादेव सहज प्रसन्न हो जाते हैं, ठीक उसी तरह से हनुमान जी भी सहज प्रसन्न हो जाते हैं। पौराणिक आख्यान यह भी मानते हैं कि हनुमान जी भगवान शंकर या महादेव के ही अवतार हैं। हनुमान जी की रुचि जितनी महादेव में है, उतनी ही राम जी में है। हनुमान जी के बिना राम दरबार पूरा नहीं होता। हनुमान जी की पूजा बाल रूप में भी होती है – इस रूप में उन्हें बालाजी कहा जाता है। राजस्थान इत्यादि क्षेत्र में ज्यादातर बालाजी के ही मंदिर मिलते हैं।


हनुमान जी वानर रूप में क्यों हैं?

भारतीय संस्कृति ने जितना महत्व इंसानों को दिया है, उतना ही महत्व अन्य जीवों को भी दिया है। पूरा जीव जगत ईश्वर द्वारा रचित है, वह ईश्वर केवल इंसान के रूप में नहीं, बल्कि किसी पशु या जीव के रूप में भी अवतार ले सकता है। पहले भगवान विष्णु ने मछली, फिर कछुआ और फिर वाराह (सुअर) के रूप में अवतार लिया। ईश्वर नर और सिंह के मिले-जुले रूप में भी आए। राम अवतार के समय चूंकि भगवान को वन में जाना था, वहां 14 वर्ष बिताने थे, इसलिए उनकी सुविधा के लिए हनुमान जी का कपि या वानर रूप में जन्म हुआ।

ईश्वर यह संदेश देना चाहते हैं कि जीवों में भेद मत करो। हर जीव के प्रति प्रेम रखो। हर जीव अपने अच्छे कर्म से ईश्वर की बताई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। ईश्वर को पाने के लिए इंसान या मानव होना जरूरी नहीं है। एक वानर भी अपने श्रेष्ठ व्यवहार से ईश्वर का सेवक बन सकता है। हनुमान जी ने यह सिद्ध कर दिया। यह कहा जाता है कि राम जी के सर्वश्रेष्ठ भक्त हनुमान जी ही हैं।


हनुमान जी की शक्तियां

हनुमान जी पवन या वायु पुत्र हैं, तो वे उड़ सकते हैं। वे अपने शरीर को जितना चाहे बढ़ा या छोटा कर सकते हैं। वे अपने बल को जितना चाहे ज्यादा या कम कर सकते हैं। वे इतने शक्तिशाली हैं कि उनको याद करते ही भय कम हो जाता है, बुरी शक्तियां भाग खड़ी होती हैं। हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं। वेदों के ज्ञाता हैं। रामचरित के मर्मज्ञ हैं। राम जी उनके हृदय में विराजते हैं। हनुमान जी की एक शक्ति उनकी सेवाएं हैं, जिनकी कोई तुलना नहीं है। उनकी सेवा में एक दाग नहीं है। वे कल भी राम जी की सेवा कर रहे थे, आज भी कर रहे हैं और हमेशा करते रहेंगे। उनकी हनुमान चालीसा भारत में सबसे ज्यादा पढ़ी-सुनी और याद की जाती है। ज्यादातर गांवों में हनुमान चालीसा की गूंज के साथ ही भोर होती है।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर.