गीता जयंती : हम भगवदगीता को क्यों मानें?

यतो धर्मस्तत: कृष्णो यत: कृष्णस्ततो जय:।

अर्थात जहां धर्म है, वहां श्रीकृष्ण हैं और जहां श्रीकृष्ण हैं, वहीं विजय है।
यदि यह कहा जाए कि श्रीकृष्ण आधी दुनिया के गुरु हैं, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। भगवदगीता को गुरु माना गया है। जिसका कोई भौतिक गुरु नहीं होता, वह भगवदगीता को अपना गुरु मान सकता है। दुनिया के एक बड़े हिस्से में श्रीकृष्ण को भगवान के रूप में भले ही स्वीकार नहीं किया जाता है, लेकिन श्रीकृष्ण ने गीता में जो ज्ञान संयोजित किया है, उसके सामने पूरी दुनिया सम्मान से झुकती है। शायद ही कोई ऐसा समझदार ज्ञानी होगा, जो गीता से प्रभावित न हो। गीता को न मानना अलग बात है, लेकिन गीता की आलोचना संभव नहीं है। गीता में वो सारे तत्व, मार्ग या उपाय बताए गए हैं, जिनसे मनुष्य अपने सर्वोच्च विकास या सद्गति को हासिल कर सकता है। हजारों जटिल सांसारिक, आध्यात्मिक प्रश्नों का उत्तर भगवदगीता में मिल जाता है।
भगवदगीता क्या है?
महाभारत युद्ध की शुरुआत में ही कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने हथियार डाल दिए थे। कौरव दल में शामिल अपने परिजनों, गुरुओं के साथ लडऩे से उन्होंने इनकार कर दिया था। तब अर्जुन के सारथी श्री कृष्ण ने जो महान ज्ञान अर्जुन को दिया, वही गीता है। इसे भगवदगीता भी कहा जाता है। इसमें 18 अध्याय हैं और 700 श्लोक। गीता में अर्जुन और श्रीकृष्ण के अलावा कुछ संवाद संजय-धृतराष्ट्र के भी हैं। युद्ध भूमि के बीच में यह ज्ञान संसार को मिला। जो अच्छे ज्ञान, अच्छे कर्म का संदेश पूरी दुनिया को देता है। गीता दुनिया का एक प्राचीनतम सम्मानित ग्रंथ है। वर्ष 1785 में चाल्र्स विल्किंस ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया था। आज यह दुनिया के लगभग सभी भाषाओं में अनुवादित रचना है।
ऐसा माना जाता है कि गीता का अवतरण ईसा पूर्व 3102 में हुआ था, गीता के अवतरण के करीब 1700 साल बाद मूसा (यहूदी विचार) का आगमन हुआ। 2500 साल बाद बुद्ध का आगमन हुआ। 3000 साल बाद ईसा मसीह आए और 3800 साल बाद पैगंबर मोहम्मद का अवतरण हुआ।
भगवदगीता की जय-जयकार
 दुनिया में शायद ही कोई ऐसी संस्कृति होगी, जो भगवदगीता के प्रभाव से बची हुई हो। दुनिया के अनेक विद्वानों ने गीता की खूब तारीफ की है। कई ऐसे पश्चिमी विद्वान भी हुए हैं, जिन्होंने गीता को पढऩे के लिए संस्कृत का ज्ञान प्राप्त किया। यह अकेला ग्रंथ है, जिसने पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इसके आलोचक भी सोच में पड़ जाते हैं कि ऐसा भी कोई ग्रंथ संभव है।
आज के युवाओं के लिए भगवदगीता के 11 प्रमुख संदेश
1 – कर्म करो, क्योंकि वही तुम्हारे हाथ में है, वहीं तुम्हें सफलता दिला सकता है।
2 – परिणाम या फल के बारे में ज्यादा मत सोचो, अच्छा करो, तो अच्छा ही होगा।
3 –  ईष्र्या, मोह न करो, संसार नश्वर है, तुम्हारे अच्छे कर्म ही तुम्हारे साथ बचेंगे।
4 – ज्ञान की तलाश करो, ज्ञानी बनो, अज्ञानी बनोगे, तो चैन से जी भी नहीं सकोगे।
5 – अच्छे काम के लिए जिद करो, लक्ष्य के पीछे लग जाओ, जरूर सफल होगे।
6 – अपने आप को किसी चीज का मालिक मत समझो। स्वार्थी नहीं, परमार्थी बनो।
7 – ईश्वर और स्वयं पर विश्वास करो, विश्वास करोगे, तो जो होगा, सही होगा।
8 – अपने मन और दिमाग पर नियंत्रण पाओ, तभी आपको सच्चा सुख मिलेगा।
9 – दूसरों की सहायता कर रहे हो, तो समझो कि ईश्वर की सहायता कर रहे हो।
10 – अच्छे कार्य तुम्हें दिव्य बना देंगे, तुममें स्वयं ही अनेक गुण दिखने लगेंगे।